नारी क्या है ?

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* नारी क्या है ? ********* – पुरुष का नारी के समान कोई मित्र नहीं है
फिर चाहे वो किसी भी रूप में क्यूँ न हो, माँ, बीबी, या दोस्त
संसार में नारी सबसे उत्तम फूल है जिसकी सुगंध और मनोहरता विचित्र है
– काव्य और प्रेम दोनों नारी- ह्रदय की संपत्ति है,
नर विजय का भूंखा होता है, और नारी समर्पण की पुरुष लूटना चाहता है, नारी लुट जाना.
– यदि संपूर्ण विश्व का राज्य भी मिले और नारी न हो तो
पुरुष भिक्षुक ही है, परन्तु अच्छे गुणवाली नारी भिक्षुक घर में हो तो वह राजा है.
– नारी प्रकृति की बेटी है, उस पर क्रोध न करो..
उसका ह्रदय कोमल है, उस पर विश्वास करो.
– नारी महान आघातों को क्षमा कर देती है,
लेकिन नहीं भूलती . नारी वादा नहीं करती परन्तु पुरुष के लिए सब कुछ न्यौछावर कर देती है
संघर्स में आदमी अकेला होता है;
सफलता में दुनियां उसके साथ होती है;
जब-जब जग उस पर हँसा है;
तब-तब उसी ने इतिहास रचा है! ******नर की आन, .. बान, … शान, …और खान नारी ही है,
नारायणी के बिन नारायण की पहचान भी अधूरी है

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Categories: कविता संग्रह | यावर आपले मत नोंदवा

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