कविता संग्रह

सरलेले क्षण

Tushar Wable:-                

आठवण माझी आली कधी

तर पापण्या जरा मीटून बघ.
सरलेल्या क्षणांमधले
संवाद जरा आठवून बघ.

आठवण माझी आली कधी
तर त्या वाट वळणाऱ्या वाटेवर बघ
त्या पाउल वाटेवरती
उमटलेली आपली पाउले बघ.

आठवण माझी आली कधी
तर उडणार्या पक्षांकडे बघ.
त्यांच्यासारखाच माझ मन
तूज्याकडे धावत आलेलं बघ.

आठवण माझी आली कधी
तर चांदण्या जरा मोजून बघ.
चांदण्या रात्री घेतलेल्या शपथेचा
शब्द न शब्द आठवून बघ.

आठवण माझी आली कधी
तर सागरकिनारी जाऊन बघ.
हजारदा किनार्याला मीठीत घेऊन सुद्धा
परतणाऱ्या नीराश लाटेच वीव्ह्लन बघ.

आठवण माझी आली कधी
तर साद मला घालून बघ
तुझ्या अवतीभोवती फीरणार
माझ अस्तित्व जरा जाणवून बघ.

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एका डोळ्याची आई

Bal Krishna Andhale

एका गावात एक बाई आपल्या छोट्या मुलाबरोबर एका छोट्या झोपडीत राहात होती. आपल्या मुलाला काही कमी पडू नयेम्हणून दिवसरात्र एक करून ती काम करत असे; पण त्या छोट्या मुलाला मात्र, आपली आई अजिबात आवडत नाही. तो तिचा तिरस्कार करत असतो; कारण तिला एक डोळा नसल्यामुळे
ती भेसूर दिसत असते. आईला तो शाळेतही येऊ देत नसतो.

एकदा एका कार्यक्रमासाठी आईला शाळेत जावे लागते; पण तिला बघून कुठे तोंड लपवावे हे मुलाला कळत नाही …. रागाचा एककटाक्ष टाकून तो तिथून पळून जातो. घरी आल्यावर तो आईला प्रचंड बोलतो.””कशाला आली होतीस शाळेत? आता माझे मित्र मला चिडवतील? मी उद्या शाळेत कसा जाऊ? तुला एक डोळा का नाही?मला तू अजिबात आवडत नाहीस.वगैरे वगैरे. आई काहीही बोलत नाही. आपण आईला खूप बोललो, याचे मुलालाही काही वाटत नाही. रागाने तो नुसता धुमसत असतो. आईशी काहीही न बोलता जेवतो आणि झोपतो. रात्री कधीतरी त्याला जाग येते; तर आपल्या मुलाची झोपमोड होऊ नये अशा दबक्‍या आवाजात त्याची आई रडत असते. पण त्याचेही त्याला काही वाटत नाही. एका डोळ्याच्या आपल्या आईचा त्याला अधिकच तिरस्कार वाटायला लागतो.

त्या क्षणी तो निर्णय घेतो, शिकून खूपमोठे व्हायचे आणि इथून बाहेर पडायचे.
त्याप्रमाणे तो खूप अभ्यास करतो. उच्च शिक्षणासाठी मोठ्या शहरात येतो.नामवंत विद्यापीठातून पदवी मिळवतो. मोठ्या कंपनीत मोठ्या हुद्‌द्‌यावर काम करू लागतो. एका सुंदर मुलीशी त्याचे लग्न होते. त्याला एक मुलगा, एक मुलगी होते. आता त्याचे कुटुंब पूर्ण होते; कारण हे सुंदर चित्र बिघडवणारी एका डोळ्याची त्याची आई तिथे नसते. तो तिला जवळजवळ विसरून गेलेला असतो. अतिशय सुखात असतो.

एक दिवस त्याच्या घराचे दार वाजते. दारात एका माणसाबरोबर त्याची तीच एकाडोळ्याची आई उभी असते. तिला बघून त्याची मुलगी घाबरून आत पळून जाते. तोआधी चक्रावतो आणि मग स्वतःला सावरत तिला म्हणतो, “”कोण आहेस तू? इथे का आलीस? बघ माझी मुलगी तुला घाबरली.
“”मी बहुतेक चुकीच्या पत्त्यावर आले,” असे काहीसे पुटपुटत आई निघून जाते. तिने आपल्याला ओळखले नाही, अशा समाधानात (?) मुलगा दार लावून घेतो.
काही दिवसांनी, माजी विद्यार्थी संमेलनासाठी त्याला त्याच्या शाळेतून पत्र येते. परत त्या गावात जाऊ नये असे वाटत असतानाही तो संमेलनाला जाण्याचा निर्णय घेतो. ऑफिसच्या कामासाठी जातोय, असे बायकोला खोटेच सांगतो.
संमेलन पार पडते. कुठल्यातरी अनामिक ओढीने त्याची पावले त्याच्याही नकळत झोपडीकडे वळतात. दाराला कुलूप असते. शेजारची बाई त्याला ओळखते आणि एक पत्र देते. ते पत्र त्याच्या आईचे असते.
तो वाचू लागतो,

“”… मी खूप आयुष्य जगले. तुझ्याकडे आता मी परत कधीही येणार नाही; पण तू कधीतरी येऊन मला भेटावेस अशी माझी खूप इच्छा आहे. शाळेच्या संमेलनाला तू येणार हे कळले होते; पण तिथे येऊन तुला भेटायचे नाही असे मी नक्की ठरवले. कारण मला माहिती आहे, एका डोळ्याची ही तुझी आई तुला आवडत नाही. मला एकच डोळा का, असेही तू मला एकदा विचारले होतेस. तेव्हा तू खूपच लहान होतास म्हणून मी काही उत्तर दिले नाही; पण आज सांगते. बाळा, तू लहान असताना एक अपघात झाला. त्या अपघातात तू तुझा एक डोळा गमावलास. एका डोळ्याने तू संपूर्ण आयुष्य कसे जगणार या विचाराने मी हैराण झाले आणि माझा एक डोळा तुला दिला. मला तुझा खूप अभिमान आहे. तू मला जे बोललास किंवा माझ्याशी जसा वागलास त्यासाठी मी तुझ्यावर अजिबात रागावलेले नाही.”तुझे माझ्यावर खूप प्रेम आहे,’ असाच विचार मी करते. कधी काळी माझ्या भोवतीभोवती खेळणारा तू मला नेहमी आठवतोस…

पत्र वाचून मुलगा ढसढसा रडू लागला.. जी व्यक्ती केवळ त्याच्यासाठी जगली, स्वतःचा सर्वात महत्त्वाचा अवयव जिनं त्याला सहजपणे देऊन टाकला, तिच्याशी आपण किती निर्दयपणे वागलो. त्याला प्रचंड पश्‍चात्ताप झाला, तो आईला मोठमोठ्याने हाका मारू लागला; पण आता त्याचा काय उपयोग होता??

मित्रानो आई-वडिलांसाठी कोणतीही गोष्ट सोडा.
पण..
कोणत्याही गोष्टीसाठी आई-वडिलांना सोडू नका;
कारण जीवनात
एक वेळ कोणतीही गोष्ट आपली साथ सोडेल;
पण

आई -वडिलांची साथ ही नेहमीच तुमच्या बरोबर आयुष्यभर असेल !!

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श्रावणातली मेंदी

Chandu Chate

ध्यानी मनी नसताना…. आयुश्यात एका क्षणी.. मैत्री प्रवेशते….
हिरव्या श्रावणात हातावर रंगलेल्या … मेंदी सारखी….
आयुश्यभर आठवत रहाते….
मैत्री म्हणजे एकमेकांना समजणं.. आणि समजावणं असतं…..
मैत्री म्हणजे… कधी कधी स्वताःलाच आजमावणं असतं …..

घट्ट लावलेलं मनाचं दार.. मैत्रीत अलगद उघड्तं….
हळव्या मनात जपलेलं अलगुजअवचित ओठांवर येतं……
मैत्री मधुनच जन्म घेतं.. निखळ प्रेमाचं रोपटं…..
प्रेम ! परमेश्वरानं माणसाला दिलेली… सर्वात सुंदर गोष्ट !……

मित्राचा सखाआणि मैत्रीणीची सखी‘……
मैत्रीतुनच फ़ुलतात नाती…. फ़ुलपाखरासारखी……..
इन्द्रधनुश्यी रंग लेवुन.. फ़ुलपाखरु आकाशात झेपावते…..
हिरव्या श्रावणातली मेंदी.. आणखीनच रंगत जाते….


 

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केलाय का कधी तुम्ही कुणाला propose ?

Pankaj Gore

केलाय का कधी तुम्ही कुणाला propose ? केलाच कधी जर तुम्ही

suppose तो क्षण नेहमी आठवणीत राहतो

नकळत कधीतरी मनात डोकावून पाहतो मानो याना मानो…………

पण तो क्षणच खूप वेडा असतो. ती “हो” बोलेल कि “नाही” बोलेल?

कि,जे मैत्रीचे नाते आहे तेहि तोडेल?

मनात सगळ्या विचारांचा काहूर माजतो

पुरुषा सारखा पुरुष पण साला प्रेमात लाजतो

मानो याना मानो………… पण तो क्षणच वेडा असतो.

एरव्ही जराही वेळ नसलेले आम्ही propose करायला मात्र बरोबर वेळ साधतो

होकार तिचा ग्राह्य धरून मनात स्वप्नाचा बंगला बांधतो,

मानो याना मानो………… पण तो क्षणच खूप वेडा असतो.

परीक्षेच्या result ची वाटली नाही भीती तेवढा तो या प्रेमाच्या result ला घाबरतो,

दुसरे काही नको हवे असते त्याला तो फक्त तिच्या एका होकारानेच सावरतो

मानो याना मानो………… पण तो क्षणच खूप वेडा असतो.

तिचे उत्तर मिळेपर्यंत वेळ पण थांबतो, घड्याळ्याच्या काट्यावर बहुतेक चिखल साठतो

चेक करा जरा ब्लड प्रेशर propose करताना म्हणे तो शिखर गाठतो

मानो याना मानो………… पण तो क्षणच खूप वेडा असतो.

साठवून ठेवा ठेवा तो आयुष्यभर, कारण तो क्षण खूप वेगळा असतो

ती नसली तरीहि तो नेहमी साथ असतो मानो याना मानो…………

पण तो क्षणच खूप वेडा असतो

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जुने दिवस..

खरं भूतकाळात जगणं मला कधी पटलंच नाही.
जुन्या दिवसात वाटायचं काही ठेवलं नाही.

आज का सगळं गोळा होऊन आलंय.
मन त्या दिवसात त्यातलंच होऊन गेलंय.

तेव्हा ते वाटायचे कसले हे दिवस
आत्ता ते जाणवतंय गेले ते दिवस

होते जे हात गळ्यात गावभर
ओळखतील ना ते हात, अडखळणार तर नाहीत
ज्यांच्याशी भांडलेलो, त्यांना जाऊन भेटायचंय

ओळखलत का सर मला, हसत हसत विचारायचंय
सापडतील ना ते आज अजूनही तिथे
मनातली घरं काही जागा सोडत नाहीत
एवढ्याश्या गोष्टी तोंड भरून सांगायचे

मंदिरात, चावडीवर माणसं जशी भेटायची
आज जर गेलो तर असतील का ते तिथेच
मनातली माणसं काही कट्टा सोडत नाहीत

रंगलेली नाती, फुललेल्या कथा
डोळ्यातल्या डोळ्यात फिरायची
कळतील ला आज तेव्हाची निर्मळ नाती
मनातले रंग काही फिके पडत नाहीत

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आठवणींचे चुंबन

थंड-गार पावसामधे
बेधुन्द होऊनि न्हावे…

तू माझ्या जवळ यावे
आणि मला मिठीत घ्यावे…

सोज्वळ तुझे तन..
माझ्या स्पर्शाने गरम व्हावे…

डोल्यातील शब्द कळावे….
लज्जेचे बंध गळावे….

श्वास श्वासातून मिसळून जावे…
थंडाव्या तही उबदार वाटावे….

मिटून डोळे..तृप्त न्हावे
तनामनात तूच भिनावे…

स्वर्गसुख अनुभवताना…
सगळ्या जगाला विसरूनी जावे…

हा पावसाळा कधीच न थांबावे….
पावसामुळे ऑफीस बंद रहावे….

तू निघून जाता सकाळी
नको ना जाऊअसे रूसावे….

पुन्हा एकदा उराशि तुला कवटाळावे…
आणि तू आठवणींचे चुंबन उराशि ठेवून जावे..

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नवीन वर्षाचा संदेश द्यायचाय…? हा घ्या…!!

नवीन वर्षाचा संदेश द्यायचाय…? हा घ्या…!!

नववर्षाच्या शुभेच्छा देणाऱया शेकडो इमेल्सपैकी हा एक गंमतीशीर ईमेल. ज्याने बनवला, त्याला खरेच दाद दिली पाहिजे मनापासून. 
संदेश पाहायचाय
१. पुढील सर्व मजकूर कॉपी करा (Ctrl C)
२. संगणकाच्या नोटपॅडमध्ये हा मजकूर पेस्ट करा.
३. नोटपॅडमध्ये पेस्ट केल्यानंतर Replace All (Ctrl H) म्हणा आणि 6 च्या जागी 6 (अंडरस्कोर) Replace all करा. 
४. वरील तिन्ही स्टेप्स् केल्यानंतर फॉन्ट साईज 6 करा आणि पाहा गंमत…!

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██████ Year 2050+ ██████


२०५० च्या वर्तमानपात्राती ल हेडलायींस कदाचीत अशाच असतील.. ..

कसाब चा जेल मध्ये मृत्यू जास्त बिर्याणी खालाल्यामुळे कोलेस्त्रोल वाढून डाय्बेतीस होवून मृत्यू

गोलमाल २७ मध्ये सुधा तुषार कपूर बोलू शकला नाही

शरद पवारांनी अर्ध जग काबीज केले

फेसबुक ला १ देश म्हणून घोषित करण्यात आले

ए राजा चा मुलगा १६जि स्कॅम मध्ये अर्रेस्त

धूम १८ मध्ये रजनीकांत आणिमकरंद यांची हौसफुल कोमेडी

चाकण टायगरस हि IPL जोइन करणारी ५५ वि टीम

फीफा चा विश्वकप मध्ये भारत आणि पाकिस्तान ह्या जोड्या फिनाले साठी सज्य झाल्या आहेत!

क्रिकेट मध्ये टी-५ चा नुकताच समावेश करण्यात आलेला आहे आणि टी-१० चा विश्वकप ब्राझील ने जिंकलेला आहे

भैयांना मुंबई काबीज करण्यात यश महाराष्ट्राचे नवीन मुख्य मंत्री लालू प्रसाद यादव यांच्याकडून खास बातमी

चेनई सुपरकिंग्स ४० वेळा IPL जिंकलेली आहे कर्णधार टाटा सिंग धोनी (MSD चा मुलगा ) याचे खास अभिनंदन

सलमान खान अजूनही अविवाहित

पेट्रोल १०००००० रुपये लिटर्स

अभिजीत बचन चे दोस्ताना ३५मध्ये आगमन (अभिषेक चा मुलगा)

ओसामा बिन लादेन ला अमेरिकेने ९९ वेळा मारले तरीही तो जिवंत होवून परत आला

शीला अजूनही जवान आहे ..

मुंबई वर परत हल्ला १० बॉम्बस्फोट!
(काही हेडलाईन्स फारच दुखद आहेत, त्यासाठी आपण एकत्र येउन लढा दिला तरच भलं.)

Sagar Mane

Categories: कविता संग्रह | यावर आपले मत नोंदवा

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी…..?

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी…..?

मेघराज पाटील



 

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी? ऐकलंय तुम्ही हे गाणं… सध्या इंटरनेटवर प्रचंड गाजतंय… तसं हे गाणं थोडं तामिळ आहे आणि थोडं इंग्लिश… अगदी स्पष्टपणे सांगायचं तर तिग्लिंश… म्हणजे आपल्याकच्या मिंग्लिश किंवा हिंग्लिश सारखं… कोणत्याही भारतीय भाषेचं इंग्रजीबरोबर फ्यूजन केलं की अशी हायब्रीड भाषा जन्म घेते. आपली बंबईया हिंदीही अशीच मराठी, हिंदी आणि गुजरातीचं फ्यूजन आहे.. 

तर पुढील वर्षी येणाऱ्या 3 (THREE) किंवा थ्री किंवा तीन या सिनेमातील हे गाणं आहे. धनुष म्हणजे रजनीचा जावई या सिनेमाचा हिरो तर कमल हसनची पोरगी श्रुती हसन हिरोईन… रजनीची मुलगी ऐश्वर्या धनुष या सिनेमाची निर्माती आहे. हे गाणं रेकॉर्ड झाल्यावर ते कुणास ठाऊक कसं इंटरनेटवर लीक झालं, तशी अनेक गाणी इंटरनेटवर लीक होतात. तसं हेही झालं, आणि या गाण्याने प्रचंड लोकप्रियता मिळवली. त्यामुळे या लोकप्रियतेचा फायदा उठविण्यासाठी या गाण्याचे हक्क असलेल्या सोनी म्युझिकने मग फक्त हे एकच गाणं इंटरनेटवर रिलीज करण्याचा निर्णय घेतला. म्हणजे अजूनही बाजारात या सिनेमाच्या म्युझिक सीडी किंवा अन्य काही लाँच झालेलं नाही. तुम्हाला हे गाणं फक्त इंटरनेटवरच ऐकता येऊ शकेल. 

आतापर्यंत तब्बल 21,66,307 नेटीझन्सनी हे गाणं सोनीच्या ऑफिशियल पेजवर पाहिलंय. या गाण्याची कॉपी करून ते वेगवेगळ्या चॅनेलवर शेअर करणारांची संख्या तर अफाट आहे. तब्बल 21 लाखांपेक्षाही जास्त लोकांना वेड लावणारं किंवा गुणगुणायला लावणारं हे गाणं सध्या इंटरनेटवरील एक परवलीचा शब्द बनलंय. फक्त तामीळनाडूच नाही तर संबंध भारत वर्षात, सर्व प्रकारचे भाषेचे अडथळे ओलांडून या गाण्याने लोकप्रियतेचे सर्व उच्चांक मोडलेत. 

चेन्नईच्या दी हिंदू या दैनिकाने आज कोलावेरी कोलावेरी डी या गाण्याची, त्याच्या लोकप्रियतेची बातमी पहिल्या पानावर छापलीय. ही बातमी सर्वांनी वाचावी अशी तर आहेच, पण त्यापेक्षाही महत्वाच्या आहेत, त्या इंटरनेट एडिशनवर संबंधित बातमीवर व्यक्त झालेल्या प्रतिक्रिया… तरूणांनी कोलावेरीची बातमी पहिल्या पानावर छापण्याचं स्वागत केलंय, तर काहीं सीनिअर सिटीझन्सनी ही बातमी पहिल्या पानावर देण्याचा निषेध केलाय. एकाच बातमीवर किती परस्पर टोकाच्या प्रतिक्रिया येऊ शकतात, हे याचं चांगलं उदाहरण.. एवढंच नाही तर तरूण आणि म्हातारे यांच्यातली दरी किती रूंदावते आहे, याचंही एक निदर्शक आहे… काहींनी म्हटलंय की ते पन्नास वर्षांपासून हिंदूचे वाचक आहेत, पण असा थिल्लरपणा त्यांनी यापूर्वी कधी अनुभवला नाही, तर काहींनी या गाण्याला विरोध असतानाही, केवळ हिंदूने पहिल्या पानावर कोलावेरीचा लेख छापलाय म्हणून ते एकलं आणि त्या गाण्याच्या प्रेमात पडले… सारच काही विलक्षण आहे… 

या गाण्याचे शब्द बघा… म्हणजे ऐका, लक्षपूर्वक.. किंवा सहज ऐकलं तरी चालेल… गुणगुणावसं वाटेल… लगेच.

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी

रिदम करेक्ट….

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
मेन्टेन धिस….
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी

डिस्टन्स ला मोनू मोनू मोनू कलरू व्हाईटू…

व्हाईट बॅकग्राऊंड नाईटू नाईटू
नाईटू करलू ब्लॅकू…

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी

व्हाईटू स्किनू… स्किनू… गर्ल.. वू.. गर्लू…
गर्लू… हर्टू.. ब्लॅकू…

आईज.. यू… आईज यू… मीट यू… मीट यू…
माय फ्यूचर डार्क यू… डार्कू…

मम्मा, नोट्स इदुथूको…
आपडिये कैला स्नॅक्स.. इदुथुको…

पा… पा… पां… पा… पा… पां… पा… पा… पां… 
सारिया वासी…
सुपर मामा रेडी…
रेडी 1… 2… 3… 4…

व्हाआ… वॉटआ… अ चेंज ओव्हर मम्म्मा…
ओ के, मम्म्मा, नाऊ ट्यून चेंज यू…
कैला ग्लास ओन्ली इंग्लीश…
हँड ला ग्लास…
ग्लास ला स्कॉच…
आईज यू फुल्ल्ल्ल, आ आ आ… टीअर यू…
एम्टी लाईफ यू…

गर्ल यू.. कम यू…  
लाईफ रिवर्स गियर यू…

लव यू, लव यू… ओ माय लव यू…
यू शोड मी बो यू…

काऊ यू काऊ यू… होली काऊ यू… 

आय वॉन्ट यू… हिअर नाऊ यू…
गॉड, आय एम डाईंग नाऊ यू… 

शी इज हॅपी, हाऊ यू… 

धिस साँग फॉर सूप बॉईजू … यू
वुई डोन्ट पॅव चॉईसू… यू..

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी

फ्लॉप साँग…

य्यो बॉईज आय एम सिंगिंग साँग…
सूप साँग..
फ्लॉप साँग..
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी

रिदम करेक्ट….

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी
मेन्टेन धिस….
व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी

अनिरूद्ध रविचंद्र या दक्षिणेतल्या संगीतकाराने हे गाणं संगीतबद्ध केलंय. तर गायलंय स्वतः धनुशनेच शिवाय या गाण्याचे बोलही त्याचेच आहेत. या गाण्याचे प्रोमो 19 नोव्हेंबर 2011 ला पहिल्यांदा यूट्यूबवर अधिकृतपणे अपलोड करण्यात आले. म्हणजे त्यापूर्वीच या गाण्याने बऱ्यापैकी लोकप्रियता मिळवली होती. ही लोकप्रियता कॅश करण्यासाठी अधिकृतपणे हे गाणं इंटरनेटवर रिलीज करण्यात आलंय. 

या सिनेमाची दिग्दर्शक असलेल्या ऐश्वर्या धनुषला या सिनेमासाठी खास तरूणाईने गच्च भरलेलं, उडत्या चालीचं आणि हलकं फुलकं… सहज गुणगुणता येईलसं गाणं हवं होतं… तशी हिरोच्या प्रेमभंगाची सिच्युएशनही या गाण्याला आहे. या सगळ्याच्या फ्यूजनमधून या गाण्याची चाल आकाराला आली, तीही अवघ्या दहाच मिनिटात…  असं कंपोजर अनिरूद्ध रविचंद्र सांगतो. त्यानंतर अवघ्या वीसच मिनिटातच या चालीवर तोडक्या मोडक्या इंग्लीशमध्ये आणि तमीळमध्ये म्हणजेच तिंग्लिशमध्ये धनुषने त्या चालीसाठी शब्द बसवले… झालं की गाणं तयार… 

या गाण्याचा गायक आणि गीतकार… धनुष सांगतो, की तसं पाहिलं तर हे गाणं बाथरूमध्ये गुणगुणावं असं आहे, हलकं.. फुलकं.. हल्ली तसा प्रत्येकाचाच कधी कधी ना हार्ट ब्रेक झालेला असतो. त्यामुळे सर्वांनाच हे गाणँ रिलेट करेल, असं त्याला वाटलं… आणि गाणं चक्क सुपर डुपर हिट झालं… म्हणजे एका गंमतशीर आणि केवळ परिस्थितीजन्य गाण्याने एक विश्वविक्रम केलाय. 

या गाण्यात असलेल्या तमीळ शब्दाचे काही तमीळ शब्दांचे अर्थ असे आहेत… 

कोलावेरी :  विश्वासघात, जीवघेणा  
सूप साँग :  प्रेमभंगाचं गीत   
सूप बॉईज :  प्रेमभंग झालेले तरूण   
शो मी बोवू यू.. : प्रेमात नाकारलेला   
 

हे गाणं अधिकृतपणे इंटरनेटवर रिलीज झाल्यानंतर म्हणजे 16 नोव्हेंबरनंतर पहिल्यांदाच म्हणजे 21 नोव्हेंबरला ट्विटरवर # kolaveri हा टॅग सर्वाधिक प्रसारित होणारा टॅग ठरला. 

एवढंच नाही तर जागतिक संगिताच्या लोकप्रियतेच्या क्रमवारीत आता हे गाणं तिसऱ्या क्रमांकावर पोहोचलंय आणि लेडी गागाच्या अल्बमला टक्कर देतंय….  

आजवर भारतातल्या शेकडो वृत्तपत्रांनी या गाण्याचं विश्लेषण करणारे आणि त्याच्या लोकप्रियतेचं रहस्य उलगडणारे लेख लिहिलेत… पण गाणं ऐकणाऱ्यांना हे असलं काहीच वाचावसं न वाटताही थेट गाणंच ऐकावं वाटतं… 

म्हणजे सध्याच्या भाषेवरून मारामारी होण्याच्या किंवा थेट मुडदे पडण्याच्या काळात एक तमीळ गाणं, भारतासारख्या खंडप्राय देशात राज्याराज्यांच्या सीमा ओलांडून लोकप्रिय होतंय… राजकीय विश्लेषक ज्याला राष्ट्रीय एकात्मता म्हणतात, ती यापेक्षा वेगळी असते का?

व्हाय धिस कोलावेरी कोलावेरी कोलावेरी डी…..?

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दूरावा अन, ऒलावा

दूरावा म्हणजे प्रेम…
अन, ऒलावा म्हणजे देखील प्रेम…
दूराव्यात असते आठवण…
अन, ऒलाव्यात असते ती साठवण…

दूराव्यात अनेक भास असतात…
अन, ऒलाव्यात तेच भास खास असतात..
दूरावा असह्य असतॊ…
ऒलावा मात्र हवाहवासा असतॊ…

दूराव्यातही असावा ऒलावा…
पण, ऒलाव्यात असू नये कधीही दूरावा…
दूराव्यात प्रेमाचं घर असतं,
अन, ऒलाव्यात त्याला सजवायचं असतं…

दूरावा तूझ्यात अन माझ्यात असला म्हणून काय झालं?
ऒलाव्यालाही हेवा वाटेल असा आहे आपल्या मनाचा आरसा…

                    Bal Krishna Andhale

 

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किती वाट बघायची तुझी सखे

 

मी तिला विचारले किती गं करतेस माझ्यावर प्रेम,
हसत म्हणाली माझ्या नजरेला जरा वाचत जा

मी विचारले किती गं असे भेटायचे चोरून चोरून,
ती म्हणाली प्रेमात थोडासा धीर धरत जा

मी म्हणालो आता मला तुझ्या साथीची गरज आहे,
ती म्हणाली त्यासाठी देवासमोर रोज हात जोडत जा

मी म्हणालो खूप ओझं झालंय एकाकीचं आता,
ती म्हणाली अरे वेड्या मग आठवणी थोडंसं रडत जा

मी म्हणालो अरे पापण्या ओल्या होतात विरहात तुझ्या,
ती म्हणाली मुखवटे घालून थोडंसं हसत जा

मी म्हणालो ऋतू सुद्धा माझ्यावर हसतो आहे,
ती म्हणाली अरे मग एक छानसी गझल ऐकत जा

मी विचारलं असतेस कुठे सध्या तू,
तेव्हा मात्र ती म्हणाली माझ्या श्वासांना तुझ्यातच कुठेतरी शोधत जा..

मी विचारलं हि कुठली रीत तुझी प्रेम करण्याची,
ती म्हणाली अरे प्रेमात कधी असाही एकमेव अनुभव घेत जा..

मी विचारलं आता किती वाट बघायची तुझी सखे,
ती म्हणाली नेहमीच तू तरसवतोस मला आता तू ही तरसून बघत जा..

मी म्हणालो आता पुरे तुझे रुसवे फुगवे अन पुरे तुझा नखरा,
ती म्हणाली अरे राजा, पुन्हा असं झालं तर मला सरळं बिलगत जा…;)

                            

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वेडापिसा मी facebook वर

दूर होतीस गेली ठाव मनाला लागत नव्हता
रमत नव्हते मन कशात जीव उदास होत होता 

पण एक दिवस आनंदाने चित्त उसळले
असेल ती facebook वर कोणीतरी म्हणाले

होऊन वेडापिसा मी जेव्हा login झालो
शोधूनी तिला मी खरोखरच थकलो

कोणी असायची अनामिक तर
कोणाला आवडत असायचा अपरिचित
मन म्हणायचे अशी नव्हती ती कदाचित

कोणाला आवडायचा शाहिद तर कोणी
fan होते criketer धोनीचे

क्षणा-क्षणाला हुरहूर मनी दाटत होती
माझी lover मला काही सापडत नव्हती

केल होत तिच्यावर true प्रेम
पण sarch केल्यावर भरपूर नाव यायची sem

कोणाची blok असायची friend list
तर कोणी असायचे एकदम क्लिष्ट

अचानक दिसली कुणाच्यातरी wall वर गुलाबाची फुले
करत होती त्या फुलांना like भरपूर मुले

कापर्या हातांनी status वाचयला घेतले
ते status तिचेच होते होती ती पहिल्यासारखीच
निखळ आनंदात विरह काटे होते वेचले

दिल्या होत्या best wishesh मी तिच्या friendlist मध्ये नसताना
होती एकटीच जगत मी तिच्या जवळ नसताना
पहिल्यासारखीच निखळ मनाने एकटीच
माझ्या प्रतीक्षेत …

नकळत हातून like झालं cament म्हणून डोळ्यात पाणी आलं
मलाही अन तिलाही, आहोत दोघे online समजलं…………..

अन सुरवात झाली chating ला अन खऱ्याखुऱ्या जीवनाला

Pavanputra Jakate

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♥♥ वयानुसार मुलीच्या नाजूक भावना ♥♥

 

♥♥ वयानुसार मुलाचे प्रेम आणि त्या प्रेमावरील मुलीच्या नाजूक भावना ♥♥ :

५ वर्षाची मुलगी :-
प्रेम म्हणजे
, मी हळूच रोज त्याच्या दप्तरातील चोकलेट काढणे पण तरी

त्याचे नेहमी तिथेच चोकलेट ठेवणे.

१० वर्षाची मुलगी :-
प्रेम म्हणजे
, एकत्र अभ्यास करताना पेन्सिल घ्यायच्या बहाण्याने

मुद्दामहून त्याने माझ्या हाताला केलेला स्पर्श.

१५ वर्षाची मुलगी
:-

प्रेम म्हणजे
, आम्ही शाळा बुडवल्या मुळे पकडले गेल्यावर

त्याने स्वताहा एकट्याने भोगलेली शिक्षा.

१८ वर्षाची मुलगी :-
प्रेम म्हणजे
, शाळेच्या निरोप समारंभात त्याने मारलेली मिठी आणि

खारट आश्रू पीत पुन्हा भेटण्याची ठेवलेली गोड अपेक्षा.

२१ वर्षाची मुलगी :-
प्रेम म्हणजे
, माझ्या कॉलेज ची सहल गेलेल्या ठिकाणी त्याने

त्याचे कॉलेज बुडवून अचानक दिलेली भेट.

२६ वर्षाची मुलगी :-
प्रेम म्हणजे
, गुढग्यावर बसून हातात गुलाबाचे फुल घेऊन

त्याने मला लग्ना साठी केलेली मागणी.

३५ वर्षाची स्त्री :-
प्रेम म्हणजे
, मी दमले आहे हे बघून त्याने स्वताहा केलेला स्वयंपाक.


६० वर्षाची स्त्री :-

प्रेम म्हणजे
, तो आजारी असून, बरेच दिवस बेड वरच असूनसुद्धा मला हसवण्यासाठी त्याने केलेला विनोद.


८० वर्षाची स्त्री :-

प्रेम म्हणजे
, त्याने शेवटचा श्वास घेताना पुढल्या जन्मात लवकरच भेटण्याचे दिलेले वचन..

  

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आम्हाला गर्लफ्रेन्ड नाही…!

आम्हाला गर्लफ्रेन्ड नाही…!
आमच्या बाईकच्या मागच्या सीट वर

धूळ नेहमीच असते.

बसुन बसुन त्यावर एखादा संटा,

तर कधी एखादी माशीच बसते
अiणी बाईक पूसण्याचे आम्ही काधिच श्रम घेत नाही.
कारण , आम्हाला गर्लफ्रेन्ड नाही…!


सीनेमा बघायला आम्ही गॅंग मधे जातो
मस्त एक बास्केट पोपकोर्न तासभर खातो
आणि बुड्ढी का बालचा चिक्कट.वाडा

काधिच घ्यावासा वाट्त नाही
कारण , आम्हाला गर्लफ्रेन्ड नाही…!


वीकएंड्ला आऊटींग करतो,

फ़क्त मित्रांबरोबर्च घालवतो
काही नाही तर मस्त झोपा काढतो
अIणी रात्री बे रात्री काधिच कोणाला

SMS करत नाही
कारण , आम्हाला गर्लफ्रेन्ड नाही…!


आमचे मोबाईलचे बिल फ़ार जास्त येत नाही,
दिवस भरात २-४ कॉल होतात, जे फ़क्त
घरी कींवा मीत्रांना असतात,
आणि आमचा फोन कधीच

जास्त एंगेज येतनाही कारण ,

आम्हाला गर्लफ्रेन्ड नाही…!
मीत्रांच्या सगळ्या प्लान मध्ये

आम्ही शामील असतो,
कधीच दूसर्र्यांच्या प्लान्स मध्ये

तोंड घालत नाही,
सुट्टी आम्हाला कधीच एकांतात
घालवावीशी वाटत नाही,
कारण , आम्हाला गर्लफ्रेन्ड नाही…

Kishor Dangade

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प्रेम करणं सोपं नसतं..

प्रेम करणं सोपं नसतं..
सर्व करतात, म्हणून करायच नसतं
चित्रपटात बघीतलं, म्हणून करायच नसतं
पुस्तकात वाचलं , म्हणून करायच नसतं
तर कुणाकडून ऐकलं, म्हणून करायच नसतं

कारण प्रेम करणं सोपं नसतं
शाळा कॉलेजांत असच घडतं
एकमेकांना बघीतलं की मन प्रेमात पडतं
जागेपणी ही मग प्रेमाचं स्वप्नं पडतं
ज्या वयात शिकायचं असतं त्यावेळी भलतचं घडतं

करीयरचं सत्यानाश तर आयुष्याचं वाटोळं होतं
सहाजीकचं मग आईवडीलांच्या ईच्छांवर पाणी पडतं
कारण प्रेम करणं सोपं नसतं
हॉटेल सिनेमागृहात नेहमी जावं लागतं

पैशाचं बजेंट नेहमी बनवावं लागतं
फोन कडे नेहमी लक्श ठेवावं लागतं
मग जागेपणीही स्वप्न दिसायला लागतं
डोक्याला ताप होऊन डोक दुखायला लागतं

आनंद कमी दुःख जास्त भोगावं लागतं
एवढ सगळं करणं खुप कठीण असतं
कारण प्रेम करणं सोपं नसतं..

-Ganesh Gite

 

Categories: कविता संग्रह | 3 प्रतिक्रिया

जान्याची खंत


 

तुला सोडुन जान्याची खंत
नेहमीच मला सतावत जाईल ।

खुप काही दिलं आणि
खुप काही घेवून जाईल ।

आठवणीँचे ओझे वाहून
नेताना सुखाचे मोती देवून जाईल ।

अश्रु नकळत टिपताना तुझे
मी ओठावर स्मितहास्य
सोडून जाईल ।

शिजविताना भविष्याचे
निखारे मी भुतकाळाला
स्मरत जाईल ।

जाता-जाता एकदा तुला
डोळेभरुन पाहून जाईल ।

एकांतात तूझेच शब्द मी
पुन्हा-पुन्हा गिरवत जाईल ।

जवळ होतो जेव्हा, तेव्हा
कदर नव्हती माझी मी
खुप-खुप दुर नीगून जाईल ।

विसरने मला, नाही होनार
शक्य तूला मी एकांतात
तूला रडवत जाईल ।

डोळे ओलावतील तूझे,
माझी कुशी तूला आठवत जाईल ।

मी जवळ नसेल तुझ्या पण
माझा आभास तूला सतावत जाईल ।


-Bal Krishna Andhale

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ठेच


चालता चालता कधीतरी ठेच लागणारच,
जगायच म्हंटल्यावर दु:ख हे असणारच.
ठेच लागणार म्हणून चालायच का सोडायच?
दू:ख आहे म्हणून का जगायच सोडायच?
दु:खातही आनंदाला कोठे तरी शोधायचे.
आतुन रडतानाही दुस-याला हसवायचं..ह्यालाच जगणे म्हणतात ….
स्वतः रडूनही जो दुसऱ्याला हसवतो ….
.दुसऱ्याच्या आनंदात आपले सुख पाहतो ….तो सुखी राहतो..!

Kishor More

Categories: कविता संग्रह | यावर आपले मत नोंदवा

शपथ शिवाची मोङू नकोस

इच्छा श्रीँची सोङू नकोस,
शपथ शिवाची मोङू नकोस,
हुतात्म्यांची स्वप्ने अशी पैँशासाठी विकू नकोस.
असेल देश गरीब आपला,
पण कचरा म्हणून हिणवू नकोस.
… … अरे आपली माती, आपली माणसं,
देश आपला विसरू नकोस.
अटकेपार झेँडे लाव,
पण माय मराठी सोडू नकोस,
¤ जय महाराष्ट्र ¤

                                                                                                                                 :-Tushar Wable

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मी स्वप्नात देवाला विचारले

एकदा मी स्वप्नात देवाला विचारले………
तु चांगल्या माणसांनाच का लवकर घेवुन जातोस???”

देव म्हणाला, “मला जी माणसं खुप आवडतात ती या पृथ्वीवर मी जास्त वेळ ठेवत नाही…..”

… … … मी म्हणालो “याचा अर्थ मी तुला आवडत नाही???”

देव म्हणाला, “तस नाही रे! तु पण मला खुप आवडतोस!”

मी म्हणालो, “मग मी या पृथ्वीवर अजुन कसा आहे???”

देव म्हणाला, “तु पृथ्वीवर माझ्यापेक्षाही कुणालातरी जास्त आवडतोस म्हणुन आहे….

                                :- Ganesh Gite

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तुझे माझे नाते

म्हणुनच ह्रदय फक्त तुझे गीत गाते
एकांतपणी ही माझ्या साथ तु येते
कळत न कळत गीत तयार होते
योगा योग म्हण नाही तर अंधश्रधा
पण लाखोंच्या दुनियेत मन तुझेच का होते ?
आधीच ठरले होते तुझे माझे नाते
म्हणुनच ह्रदय फक्त तुझे गीत गाते
टाळतो मी , जाळतो मी, तरी ही
मनापुढे कित्येकदा हारतो मी
स्वप्नात ही तुझाच वावर
झोपेत ही मुखी नाव तुझेच येते
आधीच ठरले होते तुझे माझे नाते
म्हणुनच ह्रदय फक्त तुझे गीत गाते
नाही कळत जगाला जगापलिकडे हे जाते
कृष्ण, कृष्ण “करीत मीरा विष ही पीते
ठरविले होते आधीच त्याने म्हणुन हे होते
मान न मान तु पण मन गीत तुझेच गाते
आधीच ठरले होते तुझे माझे नाते
म्हणुनच ह्रदय फक्त तुझे गीत गाते

    Shared by :- Meghraj Sanap

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