क्षण तुझे नकोत मजला
प्रत्येक क्षणी सहवास हवा
तुझ्यासवे हि पहाट हसली
ल्यायली निशा हि साज नवा
साज नवा लेऊन निशा हि
ऐसी गाफील राहिली
हलकेच डोकावली पहाट अन
सोनेरी हि सकाळ झाली !!!
| amita on कोणी प्रेम करनारा हवा | |
| Yogesh on एका डोळ्याची आई | |
| sunil on एका डोळ्याची आई | |
| deep on नवं नातं | |
| meenakshi on एका डोळ्याची आई |
i like it
खुपच सुंदर कविता